legitcueSHAK FILES
होम/जाँच टूल/शक वाली जाँच

जाँच टूल · 01

शक वाले प्लेटफ़ॉर्म की जाँच

यह टूल सही-ग़लत का फ़ैसला नहीं करता। यह सिर्फ़ एक काम करता है: आप जो पहले से जानते हैं, उसे ढाँचे के जोखिम-संकेतों से मिला देता है। नौ सवाल, दो-तीन मिनट।

लेखक legitcue संपादकीय टीम अपडेट 2026-08-25 सिर्फ़ ब्राउज़र में · ठगी का ठप्पा नहीं लगाता
वह आप तक पहुँचा कैसे?«बात पहले किसने शुरू की» — यह अकेली बात पेज की सुंदरता से ज़्यादा बताती है।
रिटर्न के बारे में क्या कहा गया?आँकड़े का आकार नहीं — «पक्का», «गारंटी», «रोज़» जैसे शब्द देखिए।
पैसा किसे भेजना है?इस सवाल का भार सबसे ज़्यादा है।
निकासी आज़माकर देखी?छोटी रक़म निकल आना किसी भी प्रचार से ज़्यादा बताता है — पर यह सबूत भी नहीं है।
आप उस साइट या ऐप तक पहुँचे कैसे?
सरकारी सूची में जाँचा?अपने ढूँढ़े रास्ते से जाइए — उनके भेजे लिंक से नहीं। भारत में FIU-IND की सूची देखिए।
समय का दबाव है?
कोई आपको «चला» रहा है?
क्या कहा गया है कि घर में मत बताना?

जोखिम के संकेत

हर जवाब के साथ यह हिस्सा बदलता रहेगा। यह टूल कभी नहीं कहेगा कि «यह ठगी है» — वह तय करना जाँच एजेंसी या अदालत का काम है, किसी वेबपेज का नहीं। यह सिर्फ़ ढाँचे के जोखिम-संकेत गिनाता है; फ़ैसला आपका।

    यह टूल कैसे इस्तेमाल करें, और नतीजा कैसे पढ़ें

    यह किस काम आता है

    जब सामने कोई अनजान प्लेटफ़ॉर्म या अनजान आदमी हो, तो सबसे मुश्किल यह नहीं होता कि जानकारी कहाँ से लाएँ — मुश्किल यह होती है कि देखना किन चीज़ों को है। ये नौ सवाल वही चीज़ें हैं, और सब ढाँचे से जुड़ी हैं, दिखावे से नहीं। इंटरफ़ेस, दस्तावेज़ और दफ़्तर की तस्वीरें — ये सब पैसे से बन जाते हैं; «पैसा किसे जाता है», «निकासी होती है या नहीं», «बात किसने शुरू की» — ये नहीं बदले जा सकते।

    सब सवालों का भार बराबर नहीं है

    सबसे भारी तीन हैं: पैसा किसी व्यक्ति के खाते में जाना, निकासी में टालमटोल या पहले पैसे भरने की माँग, और तय रिटर्न का वादा। इनमें से कोई एक भी मिले तो बाक़ी जवाब कितने भी अच्छे हों, नतीजे की दिशा नहीं बदलती। बाक़ी छह जुड़ने वाले संकेत हैं — अकेले ज़रूरी नहीं कि कुछ कहें, पर कई मिलकर रुकने की वजह बन जाते हैं।

    «ठगी है या नहीं» का जवाब यहाँ क्यों नहीं मिलता

    क्योंकि ठगी का निर्धारण जाँच या अदालती प्रक्रिया से होता है — कोई वेबपेज वह नहीं कर सकता, और उसे करना भी नहीं चाहिए। एक व्यावहारिक वजह भी है: पक्का नतीजा मिल जाने पर लोग ख़ुद जाँचना छोड़ देते हैं, और नतीजा ग़लत निकला तो नुक़सान आपका होता है। इसलिए यहाँ से संकेतों की सूची मिलती है — कहाँ-कहाँ गड़बड़ लग रही है, और आगे आम तौर पर क्या होता है।

    तीन नतीजे, कैसे पढ़ें

    कोई साफ़ संकेत नहीं: सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं — बस इन जगहों पर दरार नहीं मिली। चैनल की जाँच और छोटी निकासी बाक़ी है।
    कुछ संकेत: पैसा लगाने से पहले हर चिह्नित बात पक्की कीजिए, ख़ासकर सरकारी सूची और भुगतान किसे जा रहा है।
    संकेत घने: ट्रांसफ़र रोकिए, रिकॉर्ड सँभालिए। पैसा जा चुका हो तो ठगी के बाद वाली सूची से चलिए और «क्या नहीं करना है» ज़रूर पढ़िए।

    आपका डेटा कहाँ जाता है

    कहीं नहीं। पूरा हिसाब आपके ब्राउज़र में होता है, कुछ भी किसी सर्वर पर नहीं भेजा जाता और सेव नहीं होता। पेज रिफ़्रेश करते ही सब मिट जाता है। इस पेज पर कोई एनालिटिक्स कोड नहीं है।

    यह किसकी जगह नहीं लेता

    सरकारी सूची में जाँच की जगह नहीं, वकील की जगह नहीं, और अपनी एक छोटी निकासी आज़माने की जगह भी नहीं। यह सिर्फ़ ध्यान को सही जगह ले जाने वाला औज़ार है — नतीजा देने वाली मशीन नहीं।

    इस टूल के बारे में

    मैंने ज़्यादातर जगह «अभी जाँचा नहीं» चुना — तो नतीजा क्या होगा?

    टूल बता देगा कि जानकारी अधूरी है और कौन-सी बातें पहले पक्की करनी हैं। यह जान-बूझकर ऐसा है: जब तक भुगतान किसे जाता है, सरकारी दर्जा, और निकासी — ये तीन पक्की न हों, किसी भी नतीजे का आधार कमज़ोर है। न जाँचने पर टूल आपको तसल्ली नहीं देगा।

    नतीजा «संकेत घने» आया — क्या इसका मतलब यह ठगी है?

    नहीं। इसका मतलब है कि इन जगहों पर ढाँचा ठीक नहीं लग रहा और जोखिम बहुत ज़्यादा है। ठगी का निर्धारण जाँच एजेंसी या अदालत करती है। हालाँकि व्यावहारिक रूप से करने लायक़ काम दोनों हालात में एक ही है: ट्रांसफ़र रोकिए, सबूत सँभालिए, और वापसी का वादा करने वाले किसी भी व्यक्ति पर भरोसा मत कीजिए।

    यह टूल सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में चलता है। आपका भरा हुआ कुछ भी किसी सर्वर पर नहीं जाता और कहीं सेव नहीं होता। जोखिम सूचना