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जाँच टूल · 03

आधिकारिक चैनल जाँच सूची

नक़ल को आपकी समझ को हराने की ज़रूरत नहीं होती — बस यह काफ़ी है कि आप एक जगह नज़र न डालें। यह सूची उसी «एक नज़र» को सात हिस्सों में बाँट देती है, हर एक तीस सेकंड का।

लेखक legitcue संपादकीय टीम अपडेट 2026-08-25 सिर्फ़ ब्राउज़र में · हर बिंदु खोलकर तरीक़ा पढ़ सकते हैं

एक-एक करके पक्का कीजिएहर बिंदु के नीचे तरीक़ा और «क्या दिखे तो ठीक नहीं» लिखा है। सातों पूरे होने से पहले पासवर्ड मत डालिए, दस्तावेज़ मत भेजिए, पैसा मत भेजिए।

कैसे: यह पेज बंद कीजिए और अपने बुकमार्क से दोबारा खोलिए; या ऐप स्टोर में खोजकर डेवलपर का नाम मिलाइए।
ठीक नहीं: आप किसी के भेजे लिंक, ग्रुप के मैसेज, QR, या सर्च के विज्ञापन वाले नतीजे से आए हैं — वह जगह ख़रीदी जा सकती है, और नक़ल करने वाले अक्सर ज़्यादा बोली लगाते हैं।
कैसे: पहले सबसे दाईं तरफ़ का हिस्सा (.com वग़ैरह), फिर उससे ठीक पहले वाला शब्द — वही असली मालिक है। उसके बाद बाईं तरफ़ देखिए।
ठीक नहीं: असली नाम आगे तो दिख रहा है, पर उससे दाईं तरफ़ कोई और शब्द है — तब साइट उसी दूसरे शब्द वाली है, ब्रांड की नहीं।
कैसे: एक-एक अक्षर पढ़िए — 0 और o, बड़ा I और छोटा l, एक अक्षर ज़्यादा या कम, बीच में हाइफ़न।
ठीक नहीं: कोई भी एक अक्षर अलग — तब यह दूसरी साइट है, कोई अपवाद नहीं। दिखने में मिलते-जुलते ग़ैर-लातीनी अक्षरों से भी सावधान।
कैसे: पता-पट्टी में ताले पर क्लिक करके देखिए कि सर्टिफ़िकेट किसके नाम है।
ठीक नहीं: ताला ही न हो, या ब्राउज़र चेतावनी दे। ध्यान दीजिए: ताला होने का मतलब «आधिकारिक» नहीं है — सर्टिफ़िकेट नक़ली साइट भी ले सकती है। इसीलिए इस बिंदु का भार सबसे कम है।
कैसे: स्टोर पेज पर डेवलपर का नाम, कब से मौजूद है, और रिव्यू का इतिहास देखिए।
ठीक नहीं: ऐप किसी वेबपेज से डाउनलोड करनी पड़े, «भरोसा करें» वाली सेटिंग करनी पड़े, डेवलपर का नाम अनजाना हो, या ऐप बहुत नई हो।
कैसे: सपोर्ट हमेशा उसी ऐप या साइट के भीतर से खोलिए जिसे आप जाँच चुके हैं।
ठीक नहीं: सपोर्ट ख़ुद आपको मैसेज करे, सोशल ऐप पर संपर्क करे, या आपने «कस्टमर केयर नंबर» सर्च करके निकाला हो। असली सपोर्ट ख़ुद चलकर आपके पास नहीं आता।
कैसे: पिछली बातचीत एक बार याद कर लीजिए।
ठीक नहीं: कोई भी, किसी भी पहचान से, इनमें से कुछ माँगे। इस बिंदु पर कुछ परखना नहीं है — माँगते ही रुक जाइए, सामने वाला ख़ुद को जो भी बताए।

जाँच की स्थिति

सातों पूरे होने से पहले पासवर्ड मत डालिए, दस्तावेज़ मत भेजिए, पैसा मत भेजिए।

    पूरा तरीक़ा पढ़िए
    ये सात ही क्यों

    यह किस काम आता है

    नक़ली साइटें पेज पर कोई सुराग़ नहीं छोड़तीं — वे अक्सर असली की पूरी नक़ल होती हैं। असली सुराग़ सिर्फ़ दो जगह होते हैं: आप वहाँ पहुँचे कैसे और पता क्या है; और उसके ऊपर एक ऐसा नियम जो हर हाल में चलता है — OTP किसी को नहीं देना।

    «कहाँ से आए» पहले क्यों

    क्योंकि बाक़ी सारी जाँच इस मान्यता पर टिकी है कि आप असली पेज देख रहे हैं। अगर रास्ता ही सामने वाले का दिया हुआ है, तो जो कुछ दिख रहा है — ताला भी, सही लगता पता भी — वह उसी का इंतज़ाम हो सकता है।

    डोमेन दाएँ से क्यों पढ़ें

    क्योंकि हम बाएँ से पढ़ते हैं, जबकि डोमेन का मालिकाना दाईं तरफ़ से तय होता है। नक़ल की सबसे आम तरकीब यही है कि असली ब्रांड का नाम बाईं तरफ़ लगा दिया जाए और असली मालिकाना दाईं तरफ़ किसी अनजान शब्द के पास हो — सीधा पढ़ने पर पहली नज़र में वही शब्द दिखता है जिसकी आपको तलाश थी।

    सर्टिफ़िकेट वाला बिंदु सबसे हल्का क्यों है

    एन्क्रिप्शन यह पक्का करता है कि बीच में कोई पढ़ न सके — यह नहीं कि सामने कौन है। सर्टिफ़िकेट कोई भी ले सकता है, नक़ली साइट भी। यानी यह ज़रूरी शर्त है, काफ़ी नहीं: न हो तो पक्का ग़लत, हो तो कुछ साबित नहीं।

    सातवाँ बिंदु सबसे भारी क्यों

    क्योंकि यह इकलौता है जिसमें कोई परख नहीं करनी पड़ती। बाक़ी छह में असली-नक़ली पहचानना है; इसमें सिर्फ़ एक तय काम करना है — मना कर देना। घर के बड़ों को दस तरह की ठगी के नाम बताने से बेहतर है यही एक बात पक्की करा देना।

    दोबारा कब करें

    डिवाइस बदलने पर, नेटवर्क बदलने पर, प्लेटफ़ॉर्म के नाम से कोई मैसेज आने के बाद, और कोई बड़ा लेन-देन करने से पहले। दो-तीन मिनट लगते हैं, और ग़लती की क़ीमत उससे कहीं ज़्यादा होती है।

    आपका डेटा कहाँ जाता है

    कहीं नहीं। टिक सिर्फ़ इसी पेज पर रहते हैं — न अपलोड, न सेव; रिफ़्रेश करते ही मिट जाते हैं।

    इस सूची के बारे में

    क्या हर बार लॉगिन पर यह पूरी सूची करनी होगी?

    नहीं। रोज़ाना बुकमार्क या आधिकारिक ऐप से जाने पर पहला बिंदु ही ज़्यादातर जोखिम ढँक देता है। दोबारा करने का सही मौक़ा है — डिवाइस या नेटवर्क बदलना, प्लेटफ़ॉर्म के नाम से कोई संदेश आना, और कोई बड़ा लेन-देन करने से पहले।

    जब ताला होना कुछ साबित नहीं करता, तो उसे जाँचें ही क्यों?

    क्योंकि «ताला न होना» एक पक्का बुरा संकेत है और उसे देखने में दो सेकंड लगते हैं। उसका काम सबसे भद्दी नक़लों को छाँटना है, पहचान पक्की करना नहीं। पहचान पहले और दूसरे बिंदु से तय होती है।

    यह टूल सिर्फ़ आपके ब्राउज़र में चलता है। आपका भरा हुआ कुछ भी किसी सर्वर पर नहीं जाता और कहीं सेव नहीं होता। जोखिम सूचना