प्लेटफ़ॉर्म जोखिम
इस श्रेणी की हर फ़ाइल असल में एक ही बात पूछती है: जब पैसा आपके अपने हाथ में नहीं होता, तब जोखिम कहाँ बैठा होता है।
क्या एक्सचेंज भाग सकता है? पहले जानिए कि «भागना» चार अलग हादसे हैं
«भाग जाना» एक शब्द में चार अलग हादसे छिपे हैं — निकासी की भगदड़, ग्राहकों का पैसा कहीं और लगाना, हैक, और तकनीकी ख़राबी। हर एक के संकेत अलग हैं। साथ में: proof of reserves क्या साबित करता है और क्या नहीं।
क्या बिटकॉइन ज़ीरो हो सकता है?
सीधा जवाब: कोई गारंटी नहीं दे सकता। यह फ़ाइल बताती है कि भाव किन खंभों पर टिका है, वे खंभे कैसे गिर सकते हैं, और «ज़ीरो नहीं होगा» जैसा वादा ख़ुद शक के लायक़ क्यों है।
क्या पैसा वापस बैंक खाते में आ जाता है?
यह सबसे ज़्यादा मन में रहने वाला और सबसे कम पूछा जाने वाला सवाल है। भारत में निकासी के रास्ते, हर रास्ते की शर्तें, कितना समय लगता है, कहाँ-कहाँ अटकता है, और पहली निकासी कैसे करनी चाहिए।
क्रिप्टो और शेयर बाज़ार — जोखिम में फ़र्क़ कहाँ है
जिस चीज़ का आपको पहले से अंदाज़ा है — शेयर बाज़ार — उसी को पैमाना बनाकर पाँच बिंदुओं पर तुलना: उतार-चढ़ाव, सर्किट लिमिट, बाज़ार का समय, निवेशक सुरक्षा, और जानकारी का खुलासा।
एक्सचेंज पर रखा पैसा असल में किसका है
एक्सचेंज पर ख़रीदते समय चेन पर आम तौर पर कुछ नहीं होता — आपके पास प्लेटफ़ॉर्म की एक प्रविष्टि होती है। यह फ़र्क़ चरम स्थिति में सब कुछ तय करता है।
KYC में दिया आधार, PAN और चेहरा — लीक हुआ तो क्या होता है
KYC का डेटा सचमुच बाहर निकला है — एक मामला कंपनी ने ख़ुद माना, दूसरे पर दावे अलग-अलग हैं। रिसाव कहाँ से होता है, चोट किस क़दम पर लगती है, अपलोड से पहले पाँच चीज़ें आपके हाथ में, और ख़बर आ जाने के बाद क्या करना है।